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मेरी आँख जो खुली तो

25 October, 2009


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मुझको तुमसा कोई न मिला
आँसुओं से आँखों का आईना धुला

ज़हन के दरवाज़े पर टहलता रहा
कोई सारी-सारी रात,
मेरी आँख जो खुली तो…
मैं झुलस गया

तमाम बरस इक खा़ब के लिए
आँखें गड़ाए बैठा रहा मैं,
मेरी आँखों से -
यह परदा भी सरक गया

उजली-उजली रात भी
इक अंधा कमरा लगी
मैं जब भी बाहर निकला,
पाँव चौखट से टकरा गया

चाँद ने भी अब्र1 को…
अपने चेहरे का पर्दा बना लिया,
मैं तड़पता रहा ताउम्र
वो न आया जो इक बार गया


1. बादल, Clouds

---
लेखन वर्ष: २००३

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24 टिप्पणियाँ

सैयद | Syed said...

बहुत खूबसूरत नज़्म,

विनय भाई... काफी दिनों के बाद आपको पढ़ रहा हूँ..

योगेश स्वप्न said...

WAH VINAY BAHUT KHOOB, BAHUT ACHCHA LIKH HAI ..........KHASKAR ANTIM PARA.

राज भाटिय़ा said...

बहुत प्यारी नज्म
धन्यवाद

महफूज़ अली said...

waah! bahut hi khoobsoorat........... aapki daad deni padegi.....

Nirmla Kapila said...

bahut din baad aapakee rachana padhane ko mili jahan ke darvaje par vaah bahut sundar abhivyakti hai badhaaI

Mrs. Asha Joglekar said...

वो न आया जो इक बार गया
कितना सही कहा है । अक्सर हमारे साथ ऐसा ही होता है जब हम वक्त रहते इनसान को भी वक्त की तरह तरजीह नही दैते ।

mehek said...

behtarin,bahut sunder ,dard ka ehsaas mann ko chu gaya.

mahi said...

Vinay ji bahut dino baad pada par bahut hi sundar lines padny ko mili, Itny dino baad fir sy Well Come vinay ji

Prem said...

bahut sunder rachna

दिगम्बर नासवा said...

विनय जी ........ कमल की नज्म है ....... गहरे एहसास हैं ..........

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

इश्क के दर्द को बखूबी बयां किया है।
दिल में उतर गई नज्म।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ARUNA said...

हाय विनय कैसे हैं आप ???? बहुत दिन हो गए मुझे ब्लॉग्गिंग किये हुवे ......हमेशा की तरह बहुत अछा लगा आपके ब्लॉग पे आकर!
बहुत सुन्दर लिखा आपने!

विनय ‘नज़र’ said...

THANKYOU FRIENDS. I WILL BACK SOON.

Sudhir (सुधीर) said...

मैं तड़पता रहा ताउम्र
वो न आया जो इक बार गया


वाह! सुन्दर अभिव्यक्ति

'अदा' said...

bahut achhe khayal...!!

M VERMA said...

उसका न आना
और फिर बादलों का छाना
दर्द का एहसास
बिलकुल अपने आसपास
--
बहुत नम रचना

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाह विनय जी आप बहुत दिनों के बाद सक्रिय हुये..... बधाई...

Babli said...

बहुत ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है!

singhsdm said...

मैं तो पहली बार आपके ब्लॉग पर आया
सचमुच काफी दिलकश नज्मे लिख दी आपने....

Vinay Prajapati 'Nazar' said...

आप सभी मित्रों एवं सज्जनों से प्राप्त प्रेम का सदा आभारी हूँ

knkayastha said...

मैं जब भी बाहर निकला
पाँव चौखट से टकरा गया...

वाह...क्या खूब कहा है...