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चाहो तो घर आ जाओ...

09 September, 2009


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"एक बेवफ़ा के नाम..."

क्यों खेलते हो? जल जाओगे!
इक आग है 'विनय'
तरक़ीब पे तरक़ीब खेलते हो
कुछ और है 'विनय'

तुमने अभी 'विनय' को जाना है
'विनय' के दर्द को नहीं
'विनय' इक आईना है टूटा हुआ
जिसमें जगह मौसमे-सर्द को नहीं

दूर रहने वाले भले 'विनय' से
क़रीब आने वालों को दर्द मिलता है
बरसते हैं आँसू जब भी
'विनय' इक मौसम ज़र्द मिलता है

चाहो तो दामन छोड़ दो 'विनय' का
चाहो तो घर आ जाओ...

---
लेखन वर्ष: २००३

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34 टिप्पणियाँ

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

सुंदर प्रस्तुति। बधाई स्वीकारें।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Mrs.Bhawna K Pandey said...

tarkeeb pe trakeeb khelte ho,kuchh aur hai vinay ....
ye to main bahut pahle hi apka blog padhte hi samjh gai thi . just joking, vakai bahut achha likha hai , poorani najmo me taajgi hamesha basi rahti hai ! kya khayaal hai? :)

विनोद कुमार पांडेय said...

बेहद उम्दा प्रस्तुति.
बधाई विनय जी...सुंदर कविता.

ओम आर्य said...

एक खुबसूरत रचना .........विनय जी के दर्द को भी......

raj said...

bahut achha likha aapne.....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

वाह....।
सुन्दर कविता है।

vikram7 said...

सुंदर रचना

Udan Tashtari said...

वाह भाई ’विनय’...क्या बात है!

mahi said...

नमस्ते विनय जी,
बहुत ही खूबसूरत आप का दर्द भी झलक रहा हैं आप को बधाई

seema gupta said...

सुन्दर अभिव्यक्ति
regards

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

आज फिर इस नज्म को पढा और बिना कमेंट के रहा न गया। बहुत गहरी बातें कह दी हैं आपने। बधाई।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Meynur said...

Chaho to daaman chhod do 'Vinay' ka.... Chaho to ghar aa jaao..... Waah... sach me Badhiya likha hai...

mere shabd said...

bahut acchee rachna

महफूज़ अली said...

bhai bahut khoob likha hai

अमिताभ श्रीवास्तव said...

vinay...par likhi vinay ki rachna..aour jis chaht ko ukera he vo prem ki parakashtha to he magar usame bhi kitani saadgee he../ ye vahi kah saktaa he jiska prem atoot he ki
chaho to daaman chhor do
chaho to ghar aajao...
bahut khoob/;

Nirmla Kapila said...

विनय जी बहुत सुन्दr रच्ना है बधाई

Mrs. Asha Joglekar said...

sunder kawita. Apnee aag ko aise hee banaye rakhen.

संजीव गौतम said...

सुन्दर रचना है.

Babli said...

बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! इस बेहतरीन रचना के लिए बधाई!
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

विनय ‘नज़र’ said...

आप सभी का तहे-दिल से शुक्रिया और आपको हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ!

दर्पण साह "दर्शन" said...

Have a happy and prosperous 'Hindi Day' !

:)

उमेश कुमार said...

bahut achchhi lgi. jo man men ho whi kro kisi ka kaha nhi. kya baat hao

दिगम्बर नासवा said...

VINAY JI AUR KYA KYA HAIN AAP ........ JO BHI HAIN LAJAWAAB HAIN AAP ........ AAPKI NAZM BHI KAMAAL HAI, BAHOOT HI UMDA.........

शरद कोकास said...

हर पंक्ति मे विनय ! कितने विनय शील हैं आप !

Babli said...

बहुत ही ख़ूबसूरत, भावपूर्ण और लाजवाब रचना लिखा है आपने! बहुत बढ़िया लगा !

कोपल कोकास said...

बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने मेरे नाम की कविता है । अंकल मैनें अभी अपने ब्लोग पर रमज़ान पर लिखा है ज़रुर देखियेगा ।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सुन्दर अभिव्यक्ति!

hem pandey said...

विनय मनुष्य की ताकत होती है. सुन्दर रचना.

JHAROKHA said...

्विनय जी,
बहुत सुन्दर रचना-----नवरात्र की हार्दिक मंगलकामनायें।
पूनम

विनय ‘नज़र’ said...

आप सभी के प्रेम व स्नेह के लिए आभारी हूँ!

वन्दना अवस्थी दुबे said...

विजयादशमी की बहुत-बहुत शुभकामनायें

चाहत said...

सुंदर है बधाई