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वह कौन है?

11 August, 2009


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जिससे दुनिया ने हर चीज़ छीनी
जिसे अपनी चाहत न मिली
जिसके दरवाज़े पर खु़शी आकर लौट गयी
जिसकी आँखों से नमी सूख गयी

जिसकी तरफ़ कोई नहीं देखता
जो महफ़िल में तन्हा बैठता है
जिसके दिल में दर्द का दरिया है
जो बेरोज़गार इश्क़ से घूमता है

अजनबी है जिससे हर मौसम
जिसके पास कोई नहीं जाता
जिसके मन में सच का निवास है
जो मुसीबतों से कभी नहीं हारा

जो इबारत है इश्क़ की
जो अच्छा है ज़रा और बुरा भी
जो ताक में है बहार लौटेगी
जो जीत जायेगा सभी से

…वह कौन है?

---
लेखन वर्ष: २००३

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46 टिप्पणियाँ

दर्पण साह "दर्शन" said...

kya prashan hai vinay ji !!khoob !!

badi gehri rachna hai.

"Woh kaun hai?"
wo ek ideal purush hai vinay ji...

wo aap mani ya koi bhi ho sakta hai...
...ya shayad koi bhi nahi...

par ye "kaun" jine ki lalsa jagane ke liye dhanyavaad.

परमजीत बाली said...

विनय जी ,अजीब सा प्रश्न खड़ा कर दिया आपने.....रचना अच्छी लिखी है.....
लगता है
कोई कुँवारा मन लिए
भटकता है
मोहब्बत की तलाश में।
एक आवारा
मोहब्बत का मसीहा।

ओम आर्य said...

bahut hi badhiya......

sanjay vyas said...

कोई भी हो सकता है वो, हम आप जैसा.सरल साधारण पर विशिष्ट. मामूलीपन पर बढ़िया शब्द.

shama said...

Kaun hai wo? Aap hee batayen!

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://kavitasbyshama.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

http://shama-kahanee.blogspot.com

http://shama-baagwaanee.blogspot.com

mahi said...

sundar mahobhaaw

योगेश स्वप्न said...

achcha prashn hai, vinay prashn ka uttar paane ke liye meri aaj ki ( magar bahut pahle likhi rachna) post padhen. shayad/sambhav hai uttar mil jaaye.

incitizen said...

वाह, वाह, वह कौन है.

raj said...

boht khoobsurat rachna....kuch pankatia yaad aa gyee...jangal ke beech me jo rasta dikha raha tha,humne kabhi na socha wo koun aznabi tha......

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

प्रश्न-गीत सुन्दर लगा।
बधाई।

संजीव गौतम said...

उम्दा रचना है.

Nirmla Kapila said...

mujhe lagataa hai ki jo jeet jaayegaa vo aap hee honge varna har kisi ki racanaa me ishk

Babli said...

अत्यन्त सुंदर! श्री कृष्ण जनमाष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें!

hem pandey said...

'जिस के मन में सच का निवास है
जो मुसीबतों से कभी नहीं हारा '
- वह कोई भी हो उस व्यक्तित्व को नमन.

vikram7 said...

सुन्दर

alka sarwat said...

वह मैं हूँ !!!

amlendu asthana said...

आपका ब्लॉग अच्छा लगा। आपको जनमाष्टमी और स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।

विवेक सिंह said...

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनाएं !

विनय ‘नज़र’ said...

आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!!
----

JHAROKHA said...

vah bahut achchhee rachana...badhai...

Prem said...

kavita .ka andaz naya hai.happy janamashtamiand happy independence day.

sandhyagupta said...

Kahin aap hi to nahin?

दर्पण साह "दर्शन" said...

एक बीज,
ऊपर आने के लिए,
कुछ नीचे गया ,
ज़मीन के .


कस के पकड़ ली मिटटी ,
ताकि मिट्टी छोड़ उड़ सके .

६३ बरसा हुए आज उसे ….

…मिट्टी से कट के कौन उड़ा ,
देर तक ?

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

एंजेला...एंजेलिना जॉली said...

अरे वाह,क्या लिखा है,वो कौन है..इस सवाल के जवाब के लिए हम भी परेशान हैं...हम चाहते हैं आप हमें जरुर बताएंगे कि वो कौन है...जवाब के इंतजार में...

M.A.Sharma "सेहर" said...

Aake blog ki titliyon aur gulaab kee tarah sundar !!

रचना गौड़ ’भारती’ said...

आज़ादी की 62वीं सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाएं। इस सुअवसर पर मेरे ब्लोग की प्रथम वर्षगांठ है। आप लोगों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष मिले सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए मैं आपकी आभारी हूं। प्रथम वर्षगांठ पर मेरे ब्लोग पर पधार मुझे कृतार्थ करें। शुभ कामनाओं के साथ-
रचना गौड़ ‘भारती’

दिगम्बर नासवा said...

वाह ...... कौन है वो........... सच में ये सवाल gahra है........... लाजवाब लिखा है vinay जी...........

अमिताभ श्रीवास्तव said...

bahut khoob,
paheli bhi bana kar apani nazmo me jaan daali jaa sakti he, esa pryog koi galat nahee he..aour aap pryog karne ke maharthi he..
mujhe pasand aayi,
aour hna..aapka blog mere net par khulane me bahut der aour kabhi kabhi to khulataa hi nahi..so me apane mile samay ka upyog nahi kar paataa hu..

हितेंद्र कुमार गुप्ता said...

bahut barhia... isi tarah likhte rahiye

http://hellomithilaa.blogspot.com
mithilak gap maithili me

http://mastgaane.blogspot.com
manpasand gaane

http://muskuraahat.blogspot.com
Aapke bheje photo

Vidhu said...

ji sundar rachnaa ..badhai

विनय ‘नज़र’ said...

सभी सुधी पाठकों का सहृदय धन्यवाद! अपने आगमन से मुझे एवं मेरी रचनाओं को सदा कृतार्थ करें।

धन्यवाद!

Harkirat Haqeer said...

बहुत खूब .....!!

kshama said...

kshama said...

बिखरे सितारे ! ७) तानाशाह ज़माने !
पूजा की माँ, मासूमा भी, कैसी क़िस्मत लेके इस दुनियामे आयी थी? जब,जब उस औरत की बयानी सुनती हूँ, तो कराह उठती हूँ...

लाख ज़हमतें , हज़ार तोहमतें,
चलती रही,काँधों पे ढ़ोते हुए,
रातों की बारातें, दिनों के काफ़िले,
छत पर से गुज़रते रहे.....
वो अनारकली तो नही थी,
ना वो उसका सलीम ही,
तानाशाह रहे ज़माने,
रौशनी गुज़रती कहाँसे?
बंद झरोखे,बंद दरवाज़े,
क़िस्मत में लिखे थे तहखाने...

Aapke intezaar me hain,ye 'bikharte sitare'! Kitna simte-samete jaa sakte hain?

Aapki harek rachna...har panktee gagar me samandar liye hue hai..mai us bareme nishabd hun!

Prem Farrukhabadi said...

bahut sundar .badhai!!

gargi gupta said...

seedhe saade shavdo main bhut hi ghari baat kah di aap ne
maan tak mahsus ki
dhanyabad

महावीर said...

जिसके मन में सच का निवास है
जो मुसीबतों से कभी नहीं हारा.
सुन्दर रचना है.
महावीर शर्मा

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

रचना बहुत अच्छी लगी....बहुत बहुत बधाई....

vikram7 said...

सुन्दर रचना

Dhiraj Shah said...

ati sundar rachana

गर्दूं-गाफिल said...

बात तो गहरी है
पर अब अपनेजबानी ही बता दो वह कौन है

डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर said...

नज़र उठा के देखिये ,वह यहाँ वहां कई जगह नज़र आएगा .आज भी इसे बहुत से लोग हैं जो जीवन में सिर्फ संघर्ष कर रहे हैं और शायद बिना हरे मरते दम तक करते रहेंगे . आपकी कविता दिल को छु गयी इसे संगृहीत करके रख रही हूँ दिल के पास.

विनय ‘नज़र’ said...

सभी का हार्दिक धन्यवाद!
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प्रश्न का उत्तर है: जिसने सबके साथ भला किया और बदले में उसे बुराई उठानी पड़ी। कभी-कभी अपने आपको बुरा साबित करके आप किसी का भला कर सकते हैं ऐसा करने वाला की कविता का हीरो है।

मीनू खरे said...

अच्छी रचना है.