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times readआज फिर धुँधले बादलों के पार
देखा चाँद, सुनहरा चाँद…
आज फिर तेरी याद आयी,
आज फिर मेरा जिस्म महकने लगा
अजब क़ुरबत है आस्माँ के चाँद से
तमन्नाएँ फिर जाग उठीं,
उफ़ वह फ़ुरक़त है ज़मीं के चाँद से
आज फिर आँख भर आयी…
महकी-महकी आँखों से
देखा न गया चाँद, सुनहरा चाँद
कि ‘उसको’ देखे एक मुद्दत हुई…
शब्दार्थ:
क़ुरबत: nearness, फ़ुरक़त: separation










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