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आज फिर धुँधले बादलों के पार

03 July, 2009


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आज फिर धुँधले बादलों के पार
देखा चाँद, सुनहरा चाँद…
आज फिर तेरी याद आयी,
आज फिर मेरा जिस्म महकने लगा

अजब क़ुरबत है आस्माँ के चाँद से
तमन्नाएँ फिर जाग उठीं,
उफ़ वह फ़ुरक़त है ज़मीं के चाँद से
आज फिर आँख भर आयी…

महकी-महकी आँखों से
देखा न गया चाँद, सुनहरा चाँद
कि ‘उसको’ देखे एक मुद्दत हुई…

शब्दार्थ:
क़ुरबत: nearness, फ़ुरक़त: separation

अन्य संदर्भित नज़्में

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41 टिप्पणियाँ

ओम आर्य said...

और चाँदनी ने मदहोशी ही पैदा करती है दिल मजबूर होता है ...

MANVINDER BHIMBER said...

बहुत खूब लिखा है आपने और बिल्कुल सही फ़रमाया है! बहुत ही सुंदर रचना के मध्यम से आपने बहुत ही गहरी बात कह दी! ख़ूबसूरत रचना के लिए बधाई!

Science Bloggers Association said...

आज फिर आपकी इस शानदार कविता को पढ कर कमेण्‍ट कर रहा हूं लाजवाब।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

हिमांशु । Himanshu said...

बेहतरीन कविता । धन्यवाद ।

raj said...

ki usko dekhe ek muddat huee.....nice one...

sanjay vyas said...

आपका ये ब्लॉग उर्वर रचना भूमि के दर्शन कराता है और वैसे आप तकनीक के माहिर तो हैं ही.

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत सुंदर भावों के साथ लिखा है .

Udan Tashtari said...

वाह!! कोमल किन्तु गहरे भाव...बहुत खूब!!

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर लिखा आप ने
धन्यवाद

Meynur said...

Bahut hi kamaal ki nazm....!
Aur aakhri do misre to apne aap me ek sher samete baithe hai....

--
Sent on a phone using T9space.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

कमाल की अभिव्यक्ति है।
सुनहरा चाँद का प्रयोग
बहुत अच्छा रहा।

बवाल said...

नज़र भाई, नज़र भाई, थमिए, थमिए....।
क्या नज़र लगवाने का ही इरादा है जी ?
उफ़ वह फ़ुर्क़त है ज़मीं के चाँद से......वाह वाह वाह क्या बात है !!!

ktheLeo said...

आप के Blog के layout की खूबसूरती में ही इतना खो जाता हूं कि रचना की सुन्दरता के बारे मे लिख ही नही पाता हूं.
आप के Blog पर आकर वैसी ही ताज़गी महसूस होती है,जैसे बागों की सैर कर आये हो.

Layout की खूबसूरती और रचनाओं की महक से चित्त आनन्दित हो जाता है.

Sonalika said...

khoobsurt rachana

Nirmla Kapila said...

बहुत सुन्दर नज़्म है बधाई

अर्चना तिवारी said...

बहुत ही ख़ूबसूरत नज्म है...

GAURAV said...

nice one dear....superb

jamos jhalla said...

chand V/S chand what a CHAND comparison.
angrezi-vichar.blogspot.com

"अर्श" said...

भाई साहिब .........के उसको देखे एक मुद्दत हुई .... क्या बात कही आपने... बहोत बधाई


अर्श

Prem Farrukhabadi said...

bahut pyari rachna.pyar se bhari achchhi lagi.

दर्पण साह "दर्शन" said...

NAZAR NA LAG JAIEY...
IS NAZAM KO MERI NAZAR JI !!

...KI USKO DEKHE EK MUDDAT HUI !!

दिगम्बर नासवा said...

mahki mahki आँखों से
देखा न गया chaand

क्या खूबसूरत alfaaz हैं........... swapnil सोच.......... लाजवाब

MUFLIS said...

महकी महकी आँखों से
देखा न गया चाँद , सुनेहरा चाँद ...
क उसको देखे एक मुद्दत हुई ...

वाह ! बहुत ही खूबसूरत और मन-भावन
खयालात और उनका इज़हार ....
बधाई
---मुफलिस---

GAURAV said...

vaah ji ....jitni baar padho nayapan mehsoosh hota hai

surender said...

very nice one....

Dhiraj Shah said...

चाँद और चेहरे का सम्बन्ध सदियो पुराना है

अमिताभ श्रीवास्तव said...

wah,
aap sachmuch achha likhte he.
mazaa aata he padhhne me.

are hna, aapne jesa kahaa thaa vesa kiya magar bar thik nahi ho raha he??????

Vijay Kumar Sappatti said...

ab vinay ji main aapke blog ki tareef karun ya aapki is nazm ki ..

nazm me to jaan daal di hai aapne .. kya kahun..

meri badhai sweekar karen..
Aabhar
Vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/07/window-of-my-heart.html

नीरज गोस्वामी said...

बहुत दिलकश रचना...बधाई..
नीरज

‘नज़र’ said...

आप सभी का कृति पसंद करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

ताऊ रामपुरिया said...

वाह बेहद दिलकश रचना. शुभकामनाएं.

रामराम.

मथुरा कलौनी said...

बहुत अच्‍छा प्रयोग किया है आपने चॉंद का। पंक्तियॉं मंत्रमुग्‍ध करती हैं।

Raman said...

महकी महकी आँखों से
देखा न गया चाँद, सुनहरा चाँद
के 'उसको' देखे एक मुद्दत हुई

बात दिल में उतर गयी.....
बस..

'अदा' said...

महकी महकी आँखों से
देखा न गया चाँद, सुनहरा चाँद
के 'उसको' देखे एक मुद्दत हुई

बहुत खूबसुरत ख़याल ....
दिल के क़रीब पाया है इसे...

SWAPN said...

vinay , tumhare pinkbuds@gmail.com par email aur pas word bhej diya hai.pl do the needful.

Prem said...

क्या खूब लिखा है ,शुभकामनायें -

विनोद कुमार पांडेय said...

aapki"gulabi kopalen" man ko bha gayi..

ek ahsaas jaga gayi..

badhayi ho!!!!!

‘नज़र’ said...

thank you everybody.

अविनाश वाचस्पति said...

यहां मैं खो न जाऊं कहीं
यहीं का हो कर रह जाऊं

‘नज़र’ said...

अविनाश जी आपके के दर्शन हुए, यह मेरा सौभाग्य है।