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तेरे चेहरे ने शिकन लफ़्ज़ों में बयाँ की होगी

13 May, 2009


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तेरे चेहरे ने शिकन लफ़्ज़ों में बयाँ की होगी
कोई यूँ ही तो ख़ुद इतना फ़ुर्त नहीं होता है
लम्हा-लम्हा ख़ला-सी आँखों में क्या बदलता है?
कोई चेहरा आता है आँखों में आकर फिसलता है

बड़ा अजनबी जाना हमको जो सामान लौटा रहे हो
क्या रु-ब-रू होने वालों से कोई अजनबी होता है
मुतमइन-सा हूँ खु़द से, तेरा भी कसूर क्या है?
इस जहाँ में इक मेरे साथ ही ऐसा होता आया है

ज़बाँ से चखा है, जबसे तेरा नाम, हाँ तुम्हारा!
मुझे मिसरी की मिठास वह लज़्ज़त याद आयी नहीं
मेरी ज़ुबाँ का लहज़ा हर वक़्त खु़शनुमा रहता है
लोग कहते हैं मैं बदल गया हूँ, तुमने बदल दिया है

बेरब्त मेरी तक़दीर थी उसने तुमसे राब्ता पा लिया है
तेरे क़रीब होने से यह धुँध आँखों में भरा रहता है
तुम जब मेरे पास आकर बैठती हो लोग ताने कसते हैं
तुम्हें यह पता नहीं या तुम भी उन्हीं में शामिल हो?

---
लेखन वर्ष: २००२

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38 टिप्पणियाँ

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

दिल के जज्‍बात बडी गहराई से निकले हैं।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

रंजना [रंजू भाटिया] said...

अच्छी लगी आपकी यह नज्म शुक्रिया

Ravi Srivastava said...

आज मुझे आप का ब्लॉग देखने का सुअवसर मिला। वाकई आपने बहुत अच्छा लिखा है। आप की रचनाएँ, स्टाइल अन्य सबसे थोड़ा हट के है... आशा है आपकी कलम इसी तरह चलती रहेगी और हमें अच्छी -अच्छी रचनाएं पढ़ने को मिलेंगे. बधाई स्वीकारें।

आप मेरे ब्लॉग पर आए और एक उत्साहवर्द्धक कमेन्ट दिया, शुक्रिया.

आप के अमूल्य सुझावों और टिप्पणियों का 'मेरी पत्रिका' में स्वागत है...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत बेहतरीन नज्म।
बधाई।

Syed Akbar said...

जितना खूबसूरत आपका ब्लॉग है, उससे भी खूबसूरत नज़्म ... शुक्रिया.

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत ही उम्दा लाइनें हैं .

Nirmla Kapila said...

विनय जीापकी नज़्में पढ कर लगता है कि मै कम्मेन्ट केसे दूं ये तो सूरज को दीपक दिखाना हो गया बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है बधाई

ARUNA said...

वाह विनय, फिर से छा गए आप चारों तरफ!
बहुत खूब!

Mrs. Asha Joglekar said...

जब भी तुम मेरे पास आकर बैठते हो लोग ताने कसते है
तुम्हे पता नही या तुम भी उन्हीं में से हो ।
वाह जनाब, प्यार पे भरोसा तो करें या वो भी इकतरफा है ।

विनय said...

आप सभी पाठक मित्रों का शुक्रिया!

@निर्मला जी आप प्रोत्साहित करती रहें आपके आशीर्वाद की सदैव आवश्यकता है

@ आशा जी यह मात्र एक कविता है और जिसमें भ्रम उकेरने की कोशिश की है एक बद्सूरत लड़के की जिसे ख़ुद पे भरोसा नहीं कि कोई लड़की उसे चाह भी सकती है

@ रवि जी आप भी ब्लॉग पर आते रहें अच्छा लगता है

gargi gupta said...

vinay ji aap bhut accha likhte hai
har rachna apne aap main ek mukam rakhti hai .
aap ki rachna par tippadi karne ki hasiat to nahi hai par sach main gazab ka lekhan hai aap ka
dard ho ya khushi bhut hi manje hue dhan se bayan karte hai ......itni achchhi rachna padne ka mauka mila aap ke karan dhanyabad

kya aap mujhe bhi kaby ke johar sikha sakte hai taki main bhi apne vicharo ko bhater dhang se prastut kar saku.

विनय said...

गार्गी जी आपको एक ई-मेल लिखा दिया है, उसे ज़रूर पढ़ें। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

SWAPN said...

badhia hai bhai, meri to yahi rai hai.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

vinayji, achcha hoo/ aapki do pankti me chhupa bhaav me samjh gaya/ sach kahu to aapko samay samay par padhhta rahta hoo/ haa tippani nahi de pata, meri galti he yah/ aap jese blog mitrao se seekhne ko milta he..bas is seekhne ke chalte me tippani aadi nahi kar pata///par abse jaroor aapke saath rahoonga//

koi chehra aankho me aakar fislta he..........////

ise fislne se bachaunga aour aapko padhhungaa bhi tippani bhi dunga/

विनय said...

@स्वप्न जी, आप आये बहार आयी, बहुत-बहुत शुक्रिया।

@अमिताभ जी, ब्लॉग पर टिप्पणियाँ करना मात्र लेन-देन बन गया है किन्तु मैं इस बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखता, टिप्पणी करते रहने से अपनापन है ऐसा आभास बना रहता है, न करें तो लगता है कि शायद आपसे कोई ग़लती हो गयी और मित्र का साथ छूट गया।

अमिताभ श्रीवास्तव said...

vinayji,
sahi kahaa he aapne///
me samjhta hoo...
aapki bhavnaye...
mitrata ke liye tippani jaroori nahi balki tippani ke madhyam se mitrata jaroori he////
mitrata bani rahegi//////
aapka
Amitabh

विनय said...

@ अमिताभ जी, आपने मेरे मत से सहमति जतायी, मुझे बहुत प्रसन्नता है।

धन्यवाद

Babli said...

मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
बहुत ही शानदार नज़्म लिखा है आपने जो काफी प्रशंग्सनीय है!

zeashan zaidi said...

वाह! ऐसी उर्दू तो अब देखने को ही नहीं मिलती.

विनय said...

@बबली जी बहुत-बहुत शुक्रिया

@ ज़ीशान भाई ब्लॉग पर आते रहें, कभी मिलेंगे ताकि आपसे कुछ और नया सीख सकें। धन्यवाद!

दिगम्बर नासवा said...

खूबसूरत नज़्म है विनय जी............
आपका अंदाज भी लाजवाब है.........खू जाता हूँ जब भी आपकी नज़्म पढता हूँ

विनय said...

रजनीश जी और दिगम्बर जी बहुत-2 शुक्रिया

रचना त्रिपाठी said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

श्रद्धा जैन said...

Wah vinay ji
naam chkha hai tab se misri ki mithaas nahi aayi
bahut sunder

Harkirat Haqeer said...

विनय जी,

बहुत खूबसूरत नज़्म.....हमेशा की तरह...."जब तुम मेरे पास आकर....."
ने तो कमाल ही कर दिया.....!!

विनय said...

thanks Harkirat ji, Shrddha ji aur rachna..., keep visiting.

hem pandey said...

एक और सुन्दर रचना के लिए साधुवाद.

विनय said...

हेम जी बहुत-बहुत धन्यवाद!

शिशु said...

लेखन कला आप से सीखे तुम ही अच्छे शायर
मै तो केवल पढ़ सकता हूँ लिखने में मै कायर

सुन्दर रचना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

shishu

शिशु said...

लेखन कला आप से सीखे तुम ही अच्छे शायर
मै तो केवल पढ़ सकता हूँ लिखने में मै कायर

सुन्दर रचना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

shishu

विनय said...

शिशु भाई बड़ी तारीफ़ कर दिये, मैं तो शर्माए जा रहा हूँ। क्या हाल हैं बताया नहीं।

Meynur said...

Kafi achi kavita hai.... taarif karne ke liye alfaaz nahi mil rahe.... likha bahut khuub hai.. sab kuch hi shamil kar liya hai.....

विनय said...

प्रसन्न जी और मेयनूर जी आपकी तारीफ़ क़ुबूल और इस बात के लिए तहे दिल से शुक्रिया!

बवाल said...

क्या बात है विनय भाई। क्या रब्त को बयाँ करने का जुदा अंदाज़ पाए हुए हो आप। बेहतरीन नज़्म।

शोभा said...

अति सुन्दर ।