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यादों का सागर

16 April, 2009


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यादों का सागर
गहरा है
उसमें डूब जाऊँ तो
वक़्त का हर लम्हा
ठहरा है
कोई काँटा-सा है
जो लग गया है
इक फाँस-सा है
और फँस गया है
कोई आवाज़
हमें देता नहीं
क्या वो मकान
वीराँ हो गया है
क्या शाखों पर
गुल खिलते नहीं
या हवाओं का
रुख़ बदल गया है

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18 टिप्पणियाँ

Science Bloggers Association said...

यादों का सागर क्यों इतना गहरा है?

----------
तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

परमजीत बाली said...

सुन्दर रचना है।बधाई स्वीकारे।

mehek said...

gehan bhav sunder yaad bhi dhudhala jati hai waqt ke saath magar.jane hai har post padhi nahi jaa sakti,maafi kabul hai:).

Mumukshh Ki Rachanain said...

सुन्दर रचना, गहराई लिए हुवे,

बधाई.

यादों की गहराई, जितना गहराई में जायेंगें उतनी ही और गहराई मिलती जायेगी.

चन्द्र मोहन गुप्त

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

पतझड में ऐसा ही होता है।
पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा रोता है।

ARUNA said...

waah Vinay, bahut dinon ke baad phir se ek adbhut rachana....bahut khoob!!!

Meynur said...

As usual....... Just Superb...!

hem pandey said...

वक्त के ठहरे लम्हे को गतिमान करने की जरूरत है.
हवाओं के बदले रुख को अनुकूल करने की जरूरत है.

Sant G said...

ओह माई गॉड, आप सफेद टी शर्ट में बाईक चलाते हुये इतने स्‍मार्ट लगते हैं, बिलकुल बाईक किंग, उस समय देख कर कोई कह भी नहीं सकता कि आप दोस्‍तों को मारने के लिये इतने सख्‍त हथियार इस्‍तेमाल करते हैं। सर जी, शायरी तो लाजवाब है पर कठिन शब्‍द का अर्थ किससे पूछूं। बुरे लोगों से मैं बात ही नहीं करता और अच्‍छे से अच्‍छे लोग शब्‍द का अर्थ बता नहीं पाते। क्‍या करूं। तुम्‍हीं ने दर्द दिया है तुम्‍ही दवा देना, गरीब जानकर &आपका एक प्रशंसक

दर्पण साह "दर्शन" said...

..YA HAWAOON KA RUKH BADAL GAYA HAI....


....YAAD AA GAYI GULZAAR KI NAZM...

"WO KHAT KE PURZE UDA RAHA THA"

BADHIYA....
...BADHAI !!

विनय said...

शुक्रिया आप सभी क़द्रदानों का!

shama said...

Harek kaa rukh badal jaataa hai, mausam kaa badalna to nisarg kaa qaanoon hai.....seekh chukee hun," koyee naa sang mare.."
Yaadonke sagarmese kab koyee seepee haath lag jaay, pataahee nahee chaltaa...aisee kitnee seepiya, apne andar motee chhipaye, khul jaaneke liye aatur baithee hongee, kya jaanoon?
Aapke blogpe aake lautnekaa man nahee kartaa...
Tippaneeke liye tahe dilse shukrguzaar hun..

विनय said...

नमस्कार शमा जी,

आपकी टिप्पणी और प्रशंसा मेरे लिए काफ़ी मार्गदर्शक है।

निर्झर'नीर said...

gahre bhaav..kam shabdon mein purkashish ahsaason ki bayanii

विनय said...

निर्झर नीर जी बहुत-बहुत शुक्रिया

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sangeeta said...

yaden shayad waqt ke saath aur gahri hoti jati hain.....apki kavita dil ko chhuti hai.

विनय said...

@संगीता जी, बहुत-बहुत धन्यवाद, आप बिल्कुल सही कह रही हैं।