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एक रोशनी देखा करते थे

25 March, 2009


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तेरी चौखट पे
एक रोशनी देखा करते थे
अब न वो दिखती है
और न तुम…

रुसवा ज़िन्दगी के पल हुए
तेरी खु़दाई रंग लायी
एक रिश्ता बाँधकर
तुमने उसे तोड़ दिया…

क्या तुम्हें हम बेवफ़ा मान लें
या इसे वक़्त की रज़ा समझें
रात की घनेरियाँ छायी हैं
और सिर्फ़ एक सितारा नज़र आता है…

चलती है जो नब्ज़ तेरे बिना
उसमें ज़िन्दगी कहाँ है
हज़ार ज़ख़्म हों जिस्म पे
उनसे दर्द का बढ़ना कहाँ है

एक पल में वह
सालभर का रिश्ता तोड़ गये
जोड़े कई ग़म
और मेरा आशियाँ तोड़ गये

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26 टिप्पणियाँ

seema gupta said...

रुसवा ज़िन्दगी के पल हुए
तेरी खु़दाई रंग लायी
एक रिश्ता बाँधकर
तुमने उसे तोड़ दिया…
"ah!......tute dil or pyar ki dastan...."

Regards

SWAPN said...

sunder rachna, badhaai.

Nirmla Kapila said...

विनय जी हमेशा कीतरह सुन्दर अभिव्यक्ति है

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

कविता में भाव अच्छे हैं।
निरन्तर लिखते रहें।
बधाई।

Mumukshh Ki Rachanain said...

हनेशा के तरह ही एक और सुन्दर प्रस्तुति,
बधाई स्वीकार करें

चन्द्र मोहन गुप्त

राज भाटिय़ा said...

तेरी चौखट पे
एक रोशनी देखा करते थे अब न वो दिखती है
और न तुम… रुसवा ज़िन्दगी के पल हुए
तेरी खु़दाई रंग लायी
एक रिश्ता बाँधकर
तुमने उसे तोड़ दिया…
सारी की सारी नजम ही बहुत सुंदर,एक एक शव्द भाव मै डूबा हुआ.
धन्यवाद

अल्पना वर्मा said...

chalati hai jo nabz tere bina..us mein zindagi kahan/...
waah bahut khuub likha hai.

योगेन्द्र मौदगिल said...

अच्छी रचना के लिये बधाई स्वीकारें बंधुवर....

"अर्श" said...

विनय भाई ... चलती है जो नब्ज तेरे बिना.... वाह क्या बात कही आपने वेसे कोई और इस तरह का लिखता तो शक होता... क्यूँ के इस्तहा के कहर तो सिर्फ आप ही बरपा सकते हो..आपनी लेखनी से ...बहोत दिनों बाद आपके ब्लॉग पे आना हुआ मुआफी चाहूँगा... ढेरो बधाई स्वीकारें...

अर्श

मा पलायनम ! said...

एक रिश्ता बाँधकर
तुमने उसे तोड़ दिया…
क्या खूब ,ऐसे ही छाये रहिये .

gargi gupta said...

विनय जी आप इतना अच्छा लिखते हैकि हमारे पास शब्द नही है आप के विचारो कि अभिब्यक्ति अद्भुत है

गार्गी
abhivyakti,tk

दिगम्बर नासवा said...

एक पल में वह
साल भर का रिश्ता तोड़ गया

क्या दिल को खुल दिया है विनय जी.........
दिल की अभिव्यक्ति है आपकी रचना ......
सुन्दर रचना है

bhootnath( भूतनाथ) said...

क्या बात है भाई....ये नज़्म भी हमारे दिल में समाई....!!

hem pandey said...

सुन्दर.

Meynur said...

nice all the lines...... bahut achi nazm hai...

Science Bloggers Association said...

दिल में गहराई तक उतर जाने वाली रचना।

-----------
तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

bhootnath( भूतनाथ) said...

इतने ग़मज़दा.....!!चलो ऐसा भी कोई वक्त सही....किसी की याद में ही सही.....थोडा वक्त तो तब भी कट जाता है.....!!
मजा आया...बस इतना ही बहुत है....!!

SWAPN said...

sunder rachna ke liye badhai,

vinay, ye sandhya arya kaun hain mer post par ek comment kiya hai jo main neeche de raha hun
ARSH JI ki bato se mai bhi sahamat hun ..........par is tarah ki arithirata se bache......

main jab inke blog par jaane ki koshish karta hun , tumhara blog khulta hai,actually inhone ek shabd likha hai "arithirata " wo mujhe samajh nahin aya, main poochhna chahta tha.

विनय said...

आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है और मैं भाग्यशाली हूँ कि मुझे पढ़ रहे हैं। आप सभी का मैं बहुत-बहुत धन्यवाद व्यक्त करता हूँ!

Parul said...

bahut hi umda!!

ARUNA said...

school mein jab thi.....tab padhti thi shudh hindi!! Avval no. aate they mujhe tab.....uske baad se hindi padhna likhna chod hi dee.....thanx to the blogging world, phir se mujhe itni sundar bhasha padhne ko mil rah hi!!

विनय said...

शुक्रिया पारुल और अरूणा जी!

M.A.Sharma "सेहर" said...

व्यथित ह्रदय की दास्ताँ
बहुत खूब दर्द उकेरा !!!

ajit.irs62 said...

khoobsurat blog umda nazme.
badhai ho.
--AJIT PAL SINGH DAIA

'अदा' said...

behad khoosurat nazm..
bhai wah aap to kamal likhte hain ..
ab to baar-baar anaa hoga..